यह एक शुरुआत है
मेरे सिवा और कौन पढेगा?
फिर भी अगर आ गए सीबेरिया के पंछी की तरह
तो थोड़ा सा अपने पंखो को सुखा लो
फिर भीगते रहना मेरी बातों में
बहुत दिन हुए
वसंत को भिगोये हुए
नवीन कुमार नैथानी
सोमवार, अक्टूबर 13, 2008
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