सोमवार, अक्टूबर 13, 2008

कुछ अनकही

यह एक शुरुआत है
मेरे सिवा और कौन पढेगा?
फिर भी अगर आ गए सीबेरिया के पंछी की तरह
तो थोड़ा सा अपने पंखो को सुखा लो
फिर भीगते रहना मेरी बातों में

बहुत दिन हुए
वसंत को भिगोये हुए
नवीन कुमार नैथानी

5 टिप्‍पणियां:

siddheshwar singh ने कहा…

मे आई कम इन सर?

naveen kumar naithani ने कहा…

oh syre

naveen kumar naithani ने कहा…

oh! sure !

स्वप्नदर्शी ने कहा…

keep posting

हरकीरत ' हीर' ने कहा…

Naveenji,

Aap shuaat to kujiye ...fir dekhiye koi aata hai ya nahi.....!!